आज जब चीन भारत की सीमा के अंदर घुस कर बैठ गया है, तब इसी विषय पर बनी चेतन आनंद की फिल्म “हकीकत “ की याद आती है |
फिल्म हकीकत में भारत पर हुए पहले चीनी हमले का
चित्रण हैं | फिल्म की कहानी रियलिस्टिक और दृश्य प्रामाणिक हैं | फिल्म काफी
अच्छी बन पड़ी है | वैसे तो फिल्म के अधिकतर किरदार सैनिक है पर फिल्म की नायिका और
उसके छोटे भाई को लद्दाखी जनता के रूप में दिखाया गया है | नायिका का छोटा भाई
सैनिक बनना चाहता है और उसकी भूमिका दिल को छू जाती है | फिल्म का निर्देशन कसा
हुआ है, फ़ालतू के दृश्य ठूंसे नही गये है, शायद ये आधुनिक भारत के युद्ध पर बनी पहली
फिल्म थी | चेतन आनंद का निर्देशन काफी अच्छा है | उस जमाने में हुए युद्ध के
दृश्य असली से लगते है | वो चीनी सेना का टिड्डी दल की भांति घुसते चले आना और
भारत के फौजियों के साथ गोलीबारी सब असली लगता है ये भी दिखता है कि पहाड़ी युद्ध कितना
कठिन होता है, दुर्गम बियाबान में सैनिकों का घर से सालों दूर रहना , उनकी
मनःस्थिति , इस सबका चित्रण सजीव है और दिल को छू जाता है | फिल्म में कश्मीर और
लद्दाख के दृश्यों का चित्रण भी सुंदर है |
फिल्म का संगीत अत्यंत सुंदर और भावुक है |अधिकतर गाने पात्रों की मानसिक स्थिति को दर्शाते है | फिल्म के गाने “ज़रा सी आहट होती है ” , नज्म “मै ये सोंचकर उसके घर से उठा था “ और “ होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ” और अंतिम विदायी का वो मशहूर गाना “कर चले हम फ़िदा जानो तन साथियों ” जो आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर बजता है , अपनी लोकप्रियता खुद बताते हैं |
फिल्म में अभिनय की दृष्टि से यूँ तो सभी पात्रों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है पर बलराज साहनी ही ज्यादा बड़ी भूमिका के कारण बाजी मार ले जाते हैं लेकिन मै उस छोटे बच्चे के अभिनय को भी उनके समकक्ष ही रखना चाहूँगा | फिल्म का वो दृश्य जब एक सिपाही के घर से मिठाई के डिब्बे में घर की मिट्टी और उसके घर की क्यारी के फूलों के बीज आते है ताकि वो उस बियाबान को हरा भरा कर ले काफी अच्छा बन पड़ा है | फिल्म से मिलने वाले सन्देश की बात करें तो ये कि सीमा पर होने वाली हरकतें हल्के तौर पर नही लेनी चाहिये भले ही वो मित्र देश क्यों न हो और हमें हमेशा पूरी तैयारी रखनी चाहिए सेना को सारे साजो सामान से लैस और सैनिक पर्याप्त मात्रा में तैनात होने चाहिए |
फिल्म का संगीत अत्यंत सुंदर और भावुक है |अधिकतर गाने पात्रों की मानसिक स्थिति को दर्शाते है | फिल्म के गाने “ज़रा सी आहट होती है ” , नज्म “मै ये सोंचकर उसके घर से उठा था “ और “ होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ” और अंतिम विदायी का वो मशहूर गाना “कर चले हम फ़िदा जानो तन साथियों ” जो आज भी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर बजता है , अपनी लोकप्रियता खुद बताते हैं |
फिल्म में अभिनय की दृष्टि से यूँ तो सभी पात्रों ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है पर बलराज साहनी ही ज्यादा बड़ी भूमिका के कारण बाजी मार ले जाते हैं लेकिन मै उस छोटे बच्चे के अभिनय को भी उनके समकक्ष ही रखना चाहूँगा | फिल्म का वो दृश्य जब एक सिपाही के घर से मिठाई के डिब्बे में घर की मिट्टी और उसके घर की क्यारी के फूलों के बीज आते है ताकि वो उस बियाबान को हरा भरा कर ले काफी अच्छा बन पड़ा है | फिल्म से मिलने वाले सन्देश की बात करें तो ये कि सीमा पर होने वाली हरकतें हल्के तौर पर नही लेनी चाहिये भले ही वो मित्र देश क्यों न हो और हमें हमेशा पूरी तैयारी रखनी चाहिए सेना को सारे साजो सामान से लैस और सैनिक पर्याप्त मात्रा में तैनात होने चाहिए |


भईया लिखे शानदार हैं,और हमारा कोई भी पड़ोसी मित्र नहीं है, मैंने मूवी तो नहीं देखा है, लेकिन अब देखना पड़ेगा :D
जवाब देंहटाएंफ़िल्म की बात तो अच्छी लगी लेकिन अब लगे हाथ कोई ताजी पिक्चर बननी चाहिये जिसको देखकर चीन का जी दहल जाये और वो फ़ूट ले। :)
जवाब देंहटाएंठीक है फिर तो रामगोपाल वर्मा को काम पे लगाना पड़ेगा उन्हे की फिल्मों में इतना दम होता है | :)
जवाब देंहटाएंफ़िल्म का संगीत अद्भुत है जो इसको अमर बनाता है । कैफ़ी आज़मी के लिखे गीतों को मदन मोहन के संगीत में पिरोकर मोहम्मद रफ़ी का स्वर जादू का आभास करता है । ये गाने आकाशवाणी पर सुनते थे, जाने कितने ही भाव उमड़ पड़ते थे । गाना "हो के मजबूर..." मेरा फेवरेट है । हर सैनिक की कहानी में एक विरह की कहानी भी होती है । यह गाना उस कहानी को बड़ी खूबी से सुनाता है ।
जवाब देंहटाएंअब पाकिस्तान छोड़ के चीन पर फोकस करना पड़ेगा .... वैसे मैं भी देखि थी फ़िल्म… अच्छी है .... शानदार ..
जवाब देंहटाएंYahan koi mitr nahin ..... apni sarhadon ki suraksha ke liye har dum chaukanna rahna hoga humein....
जवाब देंहटाएंचीन का रवैया हमेशा से ही मुंह में राम बगल में छुरी वाला रहा है| यह बात इस फिल्म में भी दर्शायी गयी है जब चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुसते हुए हिंदी-चीनी भाई- भाई कहते हैं| आपका यह ब्लॉग हमें वास्तविकता दिखा रहा है कि इस युग में भी बाहुबली देश तकनीक और ताकत का इस्तेमाल विश्व शांति एवं सौहाद्र के लिए नहीं बल्कि जमीन हथिया कर मिलिटरी बेस ब
जवाब देंहटाएंनाने में करते हैं|
अच्छा लिखा है आपने..अच्छा लगा।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छा चित्रण किया है लगता है कि फिल्म देख रहे हों मन को छू गई देश के प्रति सनिकों का व नागरिकों का का जज्बा सच में एक लेखक किसी भी दृश्य को सजीव कर देता है हमारे दोनों परोसी ,चीन व पाकिस्तान मन व कर्म से अलग अलग हैं
जवाब देंहटाएंab to dekhnee hee padegee .....
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